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बटर चिकन बनाने की रेसिपी

बटर चिकन रेसिपी 🍛 Butter Chicken एक बहुत ही स्वादिष्ट और क्रीमी पंजाबी डिश है। इसे आप घर पर आसानी से बना सकते हैं। सामग्री (4 लोगों के लिए) चिकन मेरिनेशन के लिए: 500 ग्राम बोनलेस चिकन 1/2 कप दही 1 बड़ा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर 1/2 छोटा चम्मच हल्दी 1 छोटा चम्मच गरम मसाला नमक स्वादानुसार 1 बड़ा चम्मच नींबू का रस ग्रेवी के लिए: 2 बड़े टमाटर (कटे हुए) 2 प्याज (कटे हुए) 10–12 काजू 2 बड़े चम्मच मक्खन 1 बड़ा चम्मच तेल 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट 1 छोटा चम्मच कश्मीरी लाल मिर्च 1/2 कप फ्रेश क्रीम 1 छोटा चम्मच कसूरी मेथी नमक स्वादानुसार बनाने की विधि 1. चिकन मेरिनेट करें एक बाउल में चिकन और सारी मेरिनेशन सामग्री मिलाकर 30 मिनट–1 घंटे के लिए रख दें। 2. चिकन पकाएं पैन में थोड़ा तेल डालकर मेरिनेट किया हुआ चिकन हल्का सुनहरा होने तक पकाएं। फिर अलग रख दें। 3. ग्रेवी तैयार करें पैन में तेल और मक्खन गर्म करें। प्याज डालकर सुनहरा भूनें। अदरक-लहसुन पेस्ट डालें। टमाटर और काजू डालकर 5–7 मिनट पकाएं। ठंडा होने पर इसे मिक्सी में पीस लें। 4. बटर चिकन बनाएं पैन में तैयार ग्रेवी डाल...

श्रीकालभैरव मदिरा अर्पण का रहस्य

 श्रीकालभैरव मदिरा अर्पण का रहस्य अनेक नगर, पुर तथा पुरियों का अवलोकन करते हुए हनुमान तथा नारद उज्जयिनी (उज्जैन) की शिप्रा नदी के तट पर बसी अवंतिकापुरी, जिसे उज्जयिनी या उज्जैन भी कहते हैं पहुँचे । यहां महाकालेश्वर नाम का ज्योतिर्लिंग है । वहां पहुंचकर दोनों ने सर्वप्रथम शिप्रा माता को प्रणाम किया और फिर स्नान करने के बाद पुरी में प्रवेश किया। सबसे पहले उन्हें श्रीकालभैरव जी का मंदिर मिला। अवंतिका के श्री कालभैरव मंदिर में जब महावीर हनुमान तथा देवर्षि नारद जी ने प्रवेश किया, तब वहां आरती हो रही थी। भक्त नाना प्रकार के वाद्य बजा रहे थे। कुछ भावुक जन ताली बजाते हुए उमंग में झूम रहे थे। प्रधान पुजारी जी 33 दीपों की आरती घुमा रहे थे। 11-11 दीपों की तीन प्रज्वलित पंक्तियां अत्यंत सुहानी लग रही थीं। आरती हो जाने पर पुजारी जी ने नीराजन का जल छिड़का। सब ने भक्तिपूर्वक अपने मस्तक झुकाकर उस जल को अपने तन पर पड़ने दिया और अपने को कृतार्थ माना। फिर सबने करबद्ध रूप में भगवान की स्तुति आरंभ की। श्रीकालभैरव जी की पूजन-आरती देखकर हनुमान जी और नारद जी अत्यंत आनंदित हुए। उन्होंने कुछ देर वहां रुकने का...

शिव और उनके भक्त ब्राह्मण की कथा

 एक पर्वत पर शिवजी का एक सुंदर मन्दिर था। यहाँ बहुत से लोग शिवजी की पूजा के लिए आते थे। उनमें दो भक्त एक ब्राह्मण और दूसरा एक भील, नित्य आने वालों में थे। ब्राह्मण प्रतिदिन शिवजी का दूध से अभिषेक करता, उन पर फूल,पत्तियां चढ़ाता, गूगल जलाता और चंदन का लेप करता ! भील के पास तो ये सब वस्तुएं नही थी, सो वह हाथी के मदजल से शिवजी का अभिषेक करता, उन पर जंगल की फूल पत्तियां चढ़ाता और भक्तिभाव से शिवजी को रिझाने को नृत्य करता ! एक दिन ब्राह्मण जब मन्दिर गया तो उसने देखा भगवान शिव भील से बात कर रहे हैं ! ब्राह्मण को यह अच्छा नही लगा और तुरंत भगवान शिव से बोला- भगवन क्या आप मुझसे असंतुष्ट है ? मै ऊंचे कुल में पैदा हुआ हूं तथा बहुमूल्य पदार्थो से आपकी पूजा करता हूं। जबकि यह भील नीच कुल से है और अपवित्र पदार्थों से आपकी उपासना करता है ! शिवजी ने कहा- ब्राह्मण तुम ठीक कहते हो, किन्तु इस भील का जितना स्नेह मुझ पर है उतना तुम्हारा नही ! एक दिन शिवजी ने अपनी एक आंख गिरा दी। ब्राह्मण नियत समय पर पूजा करने आया। उसने देखा शिवजी की एक आंख नही है। पूजा करके वह अपने घर लौट आया ! उसके बाद भील आया,उसने देखा ...

हनुमान के जन्म की कहानी || lord hanuman story ||

पवन पुत्र हनुमान के जन्म की कहानी ज्योतिषीयों के सटीक गणना के अनुसार हनुमान जी का जन्म 1 करोड़ 85 लाख 58 हजार 113 वर्ष पहले चैत्र पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्र नक्षत्र व मेष लग्न के योग में सुबह 06:03 बजे हुआ था। वाल्मीकि रचित रामायण (मतान्तर से) के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि (छोटी दीपावली) मंगलवार के दिन हनुमान का जन्म हुआ था। हनुमान जयंती वर्ष में दो बार मनाई जाती है। पहली हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र शुक्‍ल पूर्णिमा को अर्थात ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक मार्च या अप्रैल के बीच और दूसरी कार्तिक कृष्‍ण चतुर्दशी अर्थात नरक चतुर्दशी को अर्थात सितंबर-अक्टूबर के बीच। इसके अलावा तमिलानाडु और केरल में हनुमान जयंती मार्गशीर्ष माह की अमावस्या को तथा उड़ीसा में वैशाख महीने के पहले दिन मनाई जाती है। आखिर सही क्या है? चैत्र पूर्णिमा को मेष लग्न और चित्रा नक्षत्र में प्रातः 6:03 बजे हनुमानजी का जन्म एक गुफा में हुआ था। मतलब यह कि चैत्र माह में उनका जन्म हुआ था। फिर चतुर्दर्शी क्यों मनाते हैं? वाल्मिकी रचित रामायण के अनुसार हनुमानजी का जन्म कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष क...